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उच्च माध्यमिक गणित परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर सवालों का आरोप, छात्रों-अभिभावकों में चिंता

फिलहाल, गणित परीक्षा को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था और नई परीक्षा प्रणाली पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है

19 Feb 2026

उच्च माध्यमिक गणित परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर सवालों का आरोप, छात्रों-अभिभावकों में चिंता

हुगली। पिछले गुरुवार से 2026 की उच्च माध्यमिक परीक्षा का अंतिम सत्र शुरू हुआ है। इस वर्ष पहली बार सत्र आधारित प्रणाली के तहत परीक्षा ली जा रही है। अब तक परीक्षा शांतिपूर्वक चल रही थी, लेकिन गुरुवार को गणित की परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर तीन प्रश्न आने के आरोप के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर परीक्षार्थी और अभिभावक चिंतित हैं, वहीं शिक्षानुरागी संगठन भी मुखर हो उठे हैं।
परीक्षार्थियों का कहना है कि गणित प्रश्नपत्र में कुछ ऐसे सवाल थे, जिनके उत्तर निर्धारित समय के भीतर लिखना कठिन था। शिक्षकों का आरोप है कि डिफरेंशियल इक्वेशन से जुड़ा एक प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर था। यह प्रश्न पांच(ए) में दिया गया था, जिसके पूरे दो अंक थे। इसके अलावा प्रश्न 11(बी) और (सी) को भी पाठ्यक्रम से बाहर बताया जा रहा है, जिनमें चार-चार अंक निर्धारित थे। इस तरह कुल 10 अंकों के प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर होने का दावा किया जा रहा है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि कुछ प्रश्न ऐसे थे, जिन्हें सीमित समय और निर्धारित उत्तरपुस्तिका में हल करना छात्रों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन था।
शिक्षकों की शिकायत सामने आने के बाद पश्चिम बंग उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि परिषद के अध्यक्ष चिरंजीब भट्टाचार्य ने तीनों प्रश्न गलत होने के आरोप को खारिज किया है। उनका कहना है कि दो प्रश्नों को पाठ्यक्रम से बाहर के रूप में चिह्नित किया गया है और छात्रहित में परिषद जो भी जरूरी होगा, वह करेगी।
इस पूरे मामले को लेकर शिक्षानुरागी ऐक्य मंच ने उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन के महासचिव किंकर अधिकारी ने कहा कि इस बार छात्रों को पढ़ाई और कक्षाओं के लिए पहले ही बहुत कम समय मिला है। ऐसे में यदि पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न पूछे गए हैं और कुछ सवालों के समाधान के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ती है, तो यह छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने परिषद से उचित मूल्यांकन के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
किंकर अधिकारी ने यह भी कहा कि उनका संगठन शुरू से ही सेमेस्टर प्रणाली का विरोध करता आ रहा है। उनके अनुसार, इतने कम समय में उच्च माध्यमिक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली न तो वैज्ञानिक है और न ही व्यावहारिक। सीमित अवधि में पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाना संभव नहीं है, जिससे छात्रों की बुनियाद कमजोर होती है। उन्होंने सेमेस्टर प्रणाली को वापस लेने की मांग दोहराई।
फिलहाल, गणित परीक्षा को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा व्यवस्था और नई परीक्षा प्रणाली पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।

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छात्रों-अभिभावकों में चिंता
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